आज विद्रोही चेतना के प्रखर नायक व उत्तर भारत के पेरियार ललई सिंह यादव जी की जयंती है। सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, लेखक, संपादक, प्रकाशक व कुशल अनुवादक पेरियार ललई ने आजीवन सामाजिक न्याय, समानता व शोषण-मुक्त समाज की स्थापना के लिए संघर्ष किया। वह बहुजन समाज को मानसिक गुलामी से मुक्त देखना चाहते थे। इस उद्देश्य से उन्होंने अनेक किताबों का लेखन, संपादन और अनुवाद किया। ई.वी. रामास्वामी नायकर पेरियार साहब की सुप्रसिद्ध कृति सच्ची रामायण का अनुवाद करने के कारण वह काफी चर्चित हुए थे।
उनकी प्रमुख रचनाएं निम्नांकित हैं - आर्यों का नैतिक पोल प्रकाश, आदि निवासियों की पहचान, सच्ची रामायण, सच्ची रामायण की चाभी (धर्म, मिथक व इतिहास पर चिंतन)/ शोषित संघर्ष (कविता संग्रह), भीम अभिनंदन-गीत (संकलन व संपादन)/ सिपाही की तबाही (एकांकी), शंबूक वध, बीर संत माया बलिदान, एकलव्य, अंगुलिमाल, नाग यज्ञ ( 5 नाटक)/ शोषितों सावधान, शोषितों का डिब्बा गोल, जय शोषित, शोषितों पर राजनीतिक डकैती, शोषितों पर धार्मिक डकैती, सामाजिक विषमता कैसे दूर हो, जाति-पाति मिटाने व अछूतों की तरक्की के उपाय (सामाजिक-सांस्कृतिक चिंतन)/ पेरियार ई.वी. रामास्वामी के भाषण, डॉ. अंबेडकर के भाषण, जाति-भेद का उच्छेद, सच्ची रामायण, धर्म परिवर्तन (अनुदित पुस्तकें)।
आज इस सामाजिक न्याय के योद्धा की जयंती है। उनकी स्मृति को सादर नमन्!
उनके जीवन-संघर्ष को सलाम!🙏🙏
